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भारत के फर्निचर बाजार में परिवर्तन प्लाईवुड को पीछे छोडता एमडीएफ

भारत के फर्निचर बाजार में परिवर्तन प्लाईवुड को पीछे छोडता एमडीएफ

मार्केट न्यूज़

भारत के फर्निचर बाजार में परिवर्तन प्लाईवुड को पीछे छोडता एमडीएफ

लकडी के व्यवसाय से प्रत्यक्ष या तो परोक्ष रुप से जूडे तमाम लोग यदि देखेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि अभी भारतीय फर्निचर बाजार में थोडी हलचल देखने को मिल रही है । इसे हम परिवर्तन भी कह सकते है वैश्विक झोक के चलते प्लाईवुड के सामने एम.डी.एफ. की माँग बढ रही है । तैयार फर्निचर को भी ज्यादा महत्व दिया जा रहा है । इस परिवर्तन के तहत समग्र भारत में व्यापारियों द्वारा तैयार फर्निचर की बिक्री करने का और ग्राहक द्वारा ऐसे फर्निचर की खरीददारी करने का ट्रेन्ड बढता ही जा रहा है ।

स्वीडीश फर्निचर जायन्ट आईकिया का ही उदाहरण ले । उसने हैदराबाद में अपना स्टोर शुरु किया है । हमारे भारतीय बाजार में प्लाईवुड का विकास दर क्या है ? हमारे यहाँ भारतीय बाजार में प्लाईवुड का विकास दर याने कि ग्रोथ रेट 8 से 9 प्रतिशत ही है । इसके सामने मीडीयम डेन्सीटी फाईबर बोर्ड बिज़नेस लगभग 1700 करोड का है। इस सेगमेन्ट में प्रति वर्ष करीब 17 से 20 प्रतिशत विकास हो रहा है ।

भारत में स्थिर विकास का साक्षी बनकर एम.डी.एफ. प्लाईवुड का स्थान ले चूका है । ग्रीनप्लाई कंपनी ने हाल ही में अपने ई.पी.डी. डिवीज़न को डिमर्ज करके ग्रीनपेनल के रुप में रीब्राण्ड किया है । इसके तहत अब कंपनी संपूर्ण एम.डी.एफ बिज़नेस जारी रखेंगी ।

विश्व बैंक के एक रिपोर्ट अनुसार एशिया; फर्निचर का सबसे बडा ग्राहक बाजार है । इसमें भारत का हिस्सा ज्यादा है । भारत सरकार की मेक इन ईण्डिया पहल फर्निचरके घरेलू उत्पाद को प्रोत्साहित कर रही है । विश्व बैंक का अभ्यास यह भी बताता है कि भारत का संगठीत फर्निचर बाजार वर्ष 2019 तक 32 बिलीयन डॉलर को पार करने की उम्मीद रखता है । यह बाजार वर्ष 2015 से लेकर 2020 तक प्रति वर्ष 20 प्रतिशत विकास दर की भी अपेक्षा रखता है ।

एक उत्पाद या प्रोडक्ट के रुप में एम.डी.एफ. की माँग बढ रही है । अंर्तराष्ट्रीय तौर पे देखा जाये तो 80 प्रतिशत वुड पेनल्स में एम.डी.एफ और पार्टीकल बोर्ड का इस्तेमाल होता है । दूसरी ओर इस मामले में प्लाईवुड का हिस्सा सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत है ।

भारत में देखा जाये तो स्थिति थोड़ी अलग भी देखने को मिलती है । हमारे यहाँ बाजार में प्लाईवुड का प्रभुत्व ज्यादा है । प्लाईवुड का कन्जम्पशन 80 से 85 प्रतिशत है । ग्रीनपेनल के संयुक्त एम.डी.एफ. और सी.ई.ओ. श्री शोभन मित्तल ने भारत में एम.डी. और सी.ई.ओ. श्री शोभन मित्तल ने भारत में एम.डी.एफ के उद्योग के बारे में बात करते हुए कहा था कि हमारे यहाँ प्लाईवुड के दाम बढते ही जा रहे है । कच्चे माल की उपलब्धता के मामले में भी हमारे यहाँ बहुत मुश्किल है । उनके अभिप्राय से मालूम होता है कि अब जाने वाले दिनों में बाजार में प्लाईवुड के बजाय एम.डी.एफ. का वर्चस्व रहेगा । अब पूरे देश में, ईन्टीरीयर ईन्फ्रास्ट्रक्चर एप्लीकेशन के तहत एमडीएफ की माँग ज्यादा रहने वाली है । एमडीएफ (MDF)  के बारे में बात की जायें तो कहना पडेगा कि वो एक एन्जिनीयर्ड वुड है । इसकी बनावट में हार्डवुड के फाईबर्स इस्तेमाल किये जाते है । इसकी निर्माण प्रक्रिया में सिन्थेटीक रेजीन एडहेसीव का भी उपयोग होता है।

वुडपेनल्स की बनावट में ग्रीनपेनल का नाम अग्र क्रम पर रहता है । वुड पेनल्स के उत्पाद में यह कंपनी भारत की सबसे बडी कंपनी मानी जाती है । कंपनी के उत्पाद एकम उत्तराखंड एवं आंध्रप्रदेश में कार्यरत है कि जो उच्च गुणवत्तायुक्त मीडीयम डेन्सीटी फाईबर बोर्ड का उत्पाद करते है । कंपनी के अन्य उत्पादों में प्लाईवुड, विनीयर्स, वुडन फ्लोर्स और डोर्स शामिल है ।

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